आज़ादी का मतलब मक़सद, तुम समझाने आ जाओ
घोटालों के भीड़ तंत्र को - त्याग सिखाने आ जाओ !!
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किसने किसको कैसे लूटा, किसने किसकी गरदन नापी
कुर्सी की लपटा-झपटी नित,सुबक रही है जनता प्यासी
क्योंकर तुम झूले फ़ंदे पे, ये बात बताने आ जाओ !!
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भूल गये हम त्याग तुम्हारा, ये आज़ादी कैसी है..?
लाज लुटाने पे आमादा, ये आबादी कैसी है..?
क्यों कर दी तुमने आज़ादी, इन्हैं बताने आ जाओ
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अपनी अपनी सबकी ढफ़ली,अपना अपना सबका राग
एक ओर बुझ ही पाती, दूजी ओर सुलगती आग !
बिखरे बिखरे इस भारत को- एक बनाने आ जाओ
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