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3 फ़र॰ 2009

ठीकराफोड़ एवं टीकाकरणसमारोह


एक भाई साहब इर्दगिर्द भी ऐसा ही कुछ घट रहा है जो लोग उसे जानते भी नहीं बेचारे स्नेह वश उसके माथे पे टीका लगा के चले जातें हैं क्रम चला आगे तो ये तक हुआ कि जिनके बाल कड़े होने के कारण शेव करने में कठिनाई हो रही थी उनके बाल कार्यक्रम के इंतज़ाम में शामिल एक दुर्जन के सर - कार्यक्रम के बाद के, ठीकरा फोड़ समारोह की चल-रिपोर्ट पठन से खड़े हो जाते और सट-सट शेव हो जाती . लंबे समय तक कुंठावश कसमें खाईं और खाई बनाई। जिसके बगैर सब कुछ चल सकता था । खैर "समय की प्रतीक्षा करना ज़रूरी था'' किंतु अब ज़रूरी हो गया था कि सब कुछ खुलासा कर दिया जाए सो वो आलेख के इसी किसी भाग में लिख दिया जाएगा । डरता भी हूँ की कहीं कोई बवाल न मच जाए .
किंतु एकतरफा कारर्वाई इस टीकाकरण समारोह के प्रायोजक भी अकबकाए...... अंत में पिछली कसमों पर इस उस का हवाला देकर बदली गयी जिसकी सबको उम्मीद थी
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  • नर्मदा-काधुँआधारस्वरुप:-सब को मालूम किंतु सब के लिए मनोरम नयनाभिराम दृश्य माँ ने हर और यहदृश्य नहीं रखा जहाँ ज़रूरी था वहाँ सरल मंथर भी रहीं माँ नर्मदा। नर्मदा जयंती की शुभकामनाओं के साथ

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खुलासा:-

· यूँ कि मैंने Dr. Vijay Tiwari "Kislay" एवं डूबेजीके आग्रह दिनांक 17-01-09 के कारण मीट की सहमति दी साथ ही भावातिरेक एवं ब्लागर्स मीट के लिए उत्साहित होकर आयोजन को सफल बनाने के लिए माहौल भी बनाया . समीर भाई की व्यस्तताओं के मद्दे नज़र ज़रूरी था कि उनके पिछले प्रवास पर संकल्पित मीट जैसा हश्र न हो । समय पर मैं पहुंचा किंतु कुछ मित्र अपनी वैयक्तिक परिस्थितियों के कारण न आ सके......! उनमें पंकज स्वामी,माधव सिंह यादव , डाक्टर विजय तिवारी आदि थे यह बात कोई अप्रत्याशित नहीं कोई भी व्यक्ति समय और सामयिक परिस्थिति के हाथों मजबूर हो सकता है । जो मित्र नहीं आए वे गैर जिम्मेदार नहीं थे उनकी परिस्थितियाँ थीं जो वे न आ सके. रहा आयोजन का सवाल बेहद उपयोगी था । रिपोर्ट न दे सका सरकारी व्यस्तताएं थीं . 10 से 5 बजे तक का काम नहीं है रात बिरात यदि कोई काम सौंपा जाता है निबाहना मेरा फ़र्ज़ है. जबलपुर के एक ब्लॉगर मित्र ने आयोजन की रिपोर्ट तैयार की और पोस्ट कर दी जो मीट की सफलता ही है भाई संजीव तिवारी उनकी यह तीसरी पोस्ट थी यानि मीट का असर अच्छा रहा . उधर बिटिया शैली एवं डूबे जी , सब उत्साहित रहे . एक मित्र डाक्टर प्रशांत कौरव ब्लागिंग का पाठ्यक्रम तैयार कराने का अनुरोध कर गए ताकि ब्लागिंग के लिए क्रेश कोर्स न्यूनतम दरों पर उनके कालेज जबलपुर-कालेज ऑफ़ मीडिया एंड जर्नलिज्म में चलाएं जा सकें . वे नि:शुल्क सेमीनार का भी आयोंजन करना चाहतें हैं ताकि हिन्दी-ब्लागिंग को बढावा मिले . मीट में यह भी तय हुआ कि हर ब्लॉगर कम-से-कम एक ब्लॉगर तैयार करे.
अब बताएं इसमें क्या किसी का सम्मान कम होता है सार्वजनिक कार्य करना न करना सबका अपना मामला है ।

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  • सार्वजनिक संकल्पों में कोई आए तो अच्छा न आए तो अच्छा । सभी अपना अपना व्यक्तित्व, क्षमता, दक्षता साथ लेकर चलते हैं । कोई अपनी रजाई में बैठ कर जाड़ों से बचता है तो कोई ठण्ड से बचने जोगिंग करता है। मेहनत करता है।
  • ग़लत दौनों नहीं तो भाई ग़लत कौन है...? - ग़लत हैं कुंठाएं,क्रोध,मतिभ्रम,.......
  • न तो मैं कोई संकल्प ले रहा हूँ न ही कोई कसम खा रहा हूँ कि मैं किसी समारोह में न जाउंगा जहाँ वे जातें हों जिनसे मैं असहमत हूँ ..... सच तो यह है कि मेरा शत्रु कष्ट में भी बुलाएगा तो ज़रूर जाउंगा । कोई (शत्रु-मित्र) कष्ट में होगा मुझे उसकी मदद करना ही होगा ।
  • मित्रो मुझे स्वीकारिए या नकारिये सुबह से शाम तक मुझे मेरे सभी काम पूरे करने हैं सो करूंगा सही बात सही वक्त पर करूंगा इसमें कोई गफलत होगी तो मैं जिम्मेदार हूँ कोई और नहीं ........ क्या हिन्दी ब्लॉगर की संख्या बढ़ने से किसी एक को लाभ होना है……….?

शायद राहत इन्दौरी साहब का ही शेर है:
"ता उम्र जो अपना चेहरा पढ़ सका
अब हम उसके हाथों आइना नहीं देंगे "

18 जन॰ 2009

क्या समीर भैया की शादी की सालगिरह पर ब्लागर्स मीट

उडन तश्तरी ....:जी की शादी की बीसवीं सालगिरह का किस्सा उनको अक्सर याद आ जाता है . इस बार (शायद 28 वीं सालगिरह पर वे ) उस दिन को इस तरह व्यक्त कर रहें हैं ,
एक रात ३ बजे पति के रोने की आवाज सुनकर पत्नी की नींद खुली तो देखा, पति ड्राइंगरुम में बैठा रो रहा है. पत्नी ने कारण पूछा तो कहने लगा कि तुम्हें याद है आज से २० साल पहले, जब हमारी शादी नहीं हुई थी, तुम्हारे पिता ने हमें प्यार करते पकड़ लिया था और कहा था कि या तो मेरी लड़की से विवाह करो या मैं अपने आपको गोली मार लूँगा और हत्या का इल्जाम तुम पर आयेगा. तुमको आजीवन कारावास होगा. तो मैने तुमसे शादी कर ली थी. पत्नी ने कहाः हाँ याद है मगर इसमें रोने की क्या बात है? पति बोला: सोच रहा हूँ, आज मैं छूट गया होता जेल से.
हमारी जबलपुरिया समझ को भी दाद देनी ही होगी कि हम समझ गए और हम उनके मन को सुकून देने के लिए कल यानी 19 जनवरी 2009 को ब्लागर्स-मीट विद डिनर एट 08:15 की तैयारी में हैं . मीट शुद्ध शाकाहारी भोजनालय रूपाली इन जबलपुर में आयोजित है , जो भी भाई ब्लॉगर हैं सादर आमंत्रित हैं समय का विशेष ध्यान रखा जावे रात्रि 08:15 से होटल बंद होने के 5 मिनट पूर्व तक ताकि आपका परिवार आपकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का कष्ट न उठाए

कितना असरदार

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