उनसे मेरी उल्फ़तों का सिलसिला,
चल निकला -- चल निकला
चल निकला -- चल निकला
इश्क़ का सैलाब, शक्ले-अश्क लेकर,
ढल निकला -- ढल निकला
--बवाल
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तो बवाल भाई फिर ये भी आज़मा लेतें हैं ....?
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तो बवाल भाई फिर ये भी आज़मा लेतें हैं ....?
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जबलपुर के संगीतकार सुनील पारे
जी की ब्रिगेड के लिए खास पेश कश ____________________
बवाल भाई आपकी पोस्ट में हस्तक्षेप के लिए माफ़ करेंगे मैं चाहता हूँ
आपकी पोस्ट के ऊपर कोई पोस्ट तब तक न आये जब तक की आप के सुधि पाठक इधर आ रहें हैं
सादर :"मुकुल"