बुन्देली मुक्तिका:
बरगद बब्बा
संजीव
*
बरगद बब्बा सिसक रए।
सठिया गए तो ठसक रए।।
*
तोंद फुला रए सेठ पसर
पेट श्रमिक खें पिचक रए।।
*
पंडत जी उपवास धरे-
ढेर मिठाई गटक रए।।
*
बेजा बात बनाउत हैं
कदम न धरते बिचक रए।।
*
अपना-तुपना समय किते
मोंड़ा-मोंडी मटक रए।।
*
बऊ-दद्दा खों ठगबे में
नेता तनक न हिचक रए।।
*
खाली जेब मोबाइल लै
कदम गैल पे भटक रए।।
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बरगद बब्बा
संजीव
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बरगद बब्बा सिसक रए।
सठिया गए तो ठसक रए।।
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तोंद फुला रए सेठ पसर
पेट श्रमिक खें पिचक रए।।
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पंडत जी उपवास धरे-
ढेर मिठाई गटक रए।।
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बेजा बात बनाउत हैं
कदम न धरते बिचक रए।।
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अपना-तुपना समय किते
मोंड़ा-मोंडी मटक रए।।
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बऊ-दद्दा खों ठगबे में
नेता तनक न हिचक रए।।
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खाली जेब मोबाइल लै
कदम गैल पे भटक रए।।
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