Ad

hinadi gazal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
hinadi gazal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

18 जन॰ 2010

तेवरी; पाखंडी झंडे लिये --संजीव 'सलिल'

तेवरी

संजीव 'सलिल'

पाखंडी झंडे लिये, रहे देश को लूट.

आड़ एकता की लिये, डाल रहे हैं फूट..

सज्जन पर पाबंदियाँ, लुच्चों को है छूट.

तुलसी बाहर फेंक दी, घर में रक्षित बूट..

चमचम-जगमग कलश तो, बिखरे पल में टूट.

नींव नहीं मजबूत यदि, भरी न जी भर कूट..

गुनी अल्प, निर्गुण करें, उन्हें निरंतर हूट.

ठग पुजता है संत सम, सर पर धरकर जूट..

माप श्रेष्ठता का हुआ, मंहगा चश्मा-सूट.

'सलिल' न कोई देखता, किसकी कैसी रूट?.

****************

कितना असरदार

Free Page Rank Tool

यह ब्लॉग खोजें