Ad

samyik hindi geet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
samyik hindi geet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

10 जून 2012

नवगीत: क्यों??... - संजीव सलिल

नवगीत
क्यों??... 
 - संजीव सलिल
*
*
कहीं धूप क्यों?,
कहीं छाँव क्यों??...
*
सबमें तेरा
अंश समाया,
फ़िर क्यों
भरमाती है काया?
जब पाते तब-
खोते हैं क्यों?
जब खोते
तब पाते पाया।
अपने चलते
सतत दाँव क्यों?... 
*
नीचे-ऊपर,
ऊपर-नीचे।
झूलें सब
तू डोरी खींचे,
कोई डरता,
कोई हँसता।
कोई रोये
अँखियाँ मींचे।
चंचल-घायल
हुए पाँव क्यों?... 
*
तन पिंजरे में
मन बेगाना।
श्वास-आस का
ताना-बाना।
बुनता-गुनता
चुप सर धुनता।
तू परखे,
दे संकट नाना।
सूना पनघट,
मौन गाँव क्यों?...
***

30 मई 2012

दोहा गीत: नन्हें पर... --संजीव 'सलिल'

दोहा गीत:
नन्हें पर...
संजीव 'सलिल'
*

*
नन्हें पर र्हौसला है,
तेरा विहग विशाल.
भर उड़ान नभ हो सके,
तुझको निरख निहाल..
*
रवि किरणें टेरें तुझें, खोल देखकर आँख.
कर दे आलस दूर- उठ, लग न जाए फिर आँख..

बाधा से टकरा पुलक, घूर मिलाकर आँख.
संकट-कंटक दूर हों, आप मिलाकर आँख..

कर प्रयास ऊँचा रहे,
तेरा मस्तक-भाल.
भर उड़ान नभ हो सके,
तुझको निरख निहाल..
*
भाग्य देव को मना ले, मिला आँख से आँख.
प्रियतम को प्रिय- डाल दे, जो आँखों में आँख..

पग-पग बढ़ सपने अगिन, रहे बसाये आँख.
तौल परों को- विफल हो, डबडबाये ना आँख..

श्रम-गंगा में स्नान कर,
मत प्रयास को टाल.
भर उड़ान नभ हो सके,
तुझको निरख निहाल..
*
सपने सच कर मुस्कुरा, भर-भर आये आँख.
गिर-उठ-बढ़ स्वागत करे, नगमे गाये आँख..

अपनी नजर उतर ले राई-नौंन ले आँख.
खुद को सब पर वार दे, जग उजार दे आँख..

हो विनम्र पा सफलता,
कर कुछ 'सलिल' कमाल.
भर उड़ान नभ हो सके,
तुझको निरख निहाल..
*
Acharya Sanjiv verma 'Salil'
http://divyanarmada.blogspot.in
http://hindihindi.in.divyanarmada

कितना असरदार

Free Page Rank Tool

यह ब्लॉग खोजें