तेवरी:
संजीव 'सलिल'
हुए प्यास से सब बेहाल.
सूखे कुएँ नदी सर ताल..
गौ माता को दिया निकाल.
श्वान रहे गोदी में पाल..
चमक-दमक ही हुई वरेण्य.
त्याज्य सादगी की है चाल..
शंकाएँ लीलें विश्वास.
नचा रहे नातों के व्याल..
कमियाँ दूर करेगा कौन?
बने बहाने हैं जब ढाल..
सुन न सके मौन कभी आप.
बजा रहे आज व्यर्थ गाल..
उत्तर मिलते नहीं 'सलिल'.
अनसुलझे नित नए सवाल..
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