माहिया गीत मौसम के कानों में --संजीव 'सलिल'

माहिया गीत   
मौसम के कानों में
संजीव 'सलिल'
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मौसम के कानों में
कोयलिया बोले,
खेतों-खलिहानों में।
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आओ! अमराई से
 
आज मिल लो गले, 
भाई और माई से।
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आमों के दानों में,
गर्मी रस घोले,
बागों-बागानों में---
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होरी, गारी, फगुआ
गाता है फागुन,
बच्चा, बब्बा, अगुआ।
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प्राणों में, गानों में,
मस्ती है छाई,
दाना-नादानों में---
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Acharya Sanjiv verma 'Salil'
सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम
http://divyanarmada.blogspot.com
http://hindihindi.in

1 टिप्पणी:

कँवल ताल में एक अकेला संबंधों की रास खोजता !
आज त्राण फैलाके अपने ,तिनके-तिनके पास रोकता !!
बहता दरिया चुहलबाज़ सा, तिनका तिनका छिना कँवल से !
दौड़ लगा देता है पागल कभी त्राण-मृणाल मसल के !
सबका यूं वो प्रिय सरोज है , उसे दर्द क्या कौन सोचता !!