रिफ्रेश महाशक्ति जी का ब्रिगेड में स्वागत है. जबलपुर ब्रिगेड ने तय किया है इनका विवाह जबलपुर में तय कराया जावेगा कोकास जी की जनकपुरी भी यहाँ है
मयकदा पास हैं पर बंदिश हैं ही कुछ ऐसी ..... मयकश बादशा है और हम सब दिलजले हैं !!
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19 नव॰ 2009
चर्चित चर्चा के अलावा प्रभावी हो रही इन चर्चाओं को देखिये
चर्चित चर्चा के अलावा प्रभावी हो रही इन चर्चाओं को देखिये तेजी से इनके ग्राफ में उठाव आ रहा है. इब इनको कोई कब तक इग्नोर करेगा शायद आप भी नहीं. हिंदी ब्लागिंग के लिए ज़रूरी है कि जो करें गंभीर हो कर करें चर्चा टिप्पणी,लेखन इसमें सब कुछ शामिल है. आभासी दुनिया में जहां भी कहीं विस्तृत सोच का अभाव रहा तो ज़रूर तय है हिंदी चिट्ठाकारिता के बुरे दिन शुरू होने. वैसे हर गलत काम का विरोध करना बेहद ज़रूरी है इसमें किसी को किसी से नातेदारी निभाने की कोई ज़रुरत नहीं अरे जो गलत है सो गलत है जैसा यदि ब्लॉग का उपयोग सलीम खान ब्रांड दीमकें कुंठा-निकालने के लिए करें तो इसका विरोध न कर उसे इग्नोर करने की सलाह देने वालों को मेरी सलाह है कि नकारात्मकता को समूल नष्ट करनें का प्रयास खुलकर किया जाए दूसरी ओर जो लेखन आपकी दृष्टी में उत्तम है अवश्य सबके सामने लाएं इन तीन चर्चात्मक चिट्ठों ने सबको जोड़ा है विचार और तरीका सहज है. मुन्ना भाई तो अदभुत शैली की वज़ह से प्रभावी बन रहा.... है!
रिफ्रेश महाशक्ति जी का ब्रिगेड में स्वागत है. जबलपुर ब्रिगेड ने तय किया है इनका विवाह जबलपुर में तय कराया जावेगा कोकास जी की जनकपुरी भी यहाँ है
रिफ्रेश महाशक्ति जी का ब्रिगेड में स्वागत है. जबलपुर ब्रिगेड ने तय किया है इनका विवाह जबलपुर में तय कराया जावेगा कोकास जी की जनकपुरी भी यहाँ है
8 अक्टू॰ 2009
आज डूबे जी के अखबार में
ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ जी कल "खज़ाना" में जो कुछ लिखा था आज दुबे जी वही डूबे जी वाले के अखबार यानी नई दुनिया के जबलपुर एडीशन में आज छापा है . जो बाएँ तरफ वाली करतूत है अपने डूबेजी की है शहर भर के चंदू भाई लोग उनकी तलाश में निकले और वे अपने आप को बचाने सरे-शाम घर में जा छुपे.......! अब जब इसी बहानेकरवा चौथ की बात निकल ही चुकी है तो आज दिन भर जो भी कुछ घटा सो जानिए . एक पुरानी प्रेमिका कल्लू जी से मिली तो पता है झट उसने बच्चे से कहा -"बेटे, ये कल्लू मामा हैं प्रणाम करो इनको !"
इधर मेरी श्रीमती जी मुझसे मेरा ये वाला रूमानी ब्लॉग खोल कर कहतीं है "कह दो न इस पर जो भी लिखते हो सिर्फ मेरे लिए ही है मुझ पर केन्द्रित ही है ".......अब बताइये 45 बरस की उम्र में हम क्यों जोखिम उठाएं सच बोल कर तलाक की नौबत क्यों लायें ? इस उम्र में हम जैसों में ध्वनि-हीन संवाद करने की स्किल विकसित हो ही जाती है.क्यों उड़न तश्तरी जी सही है न ..? आप तो इस फील्ड के उधर रचना ने किसी की मूर्खताओं की मज़म्मत देख मन को लगा की सभी कुत्सिस कोशिशों के लिए एकजुट हो रहे हैं. किन्तु सच कहूं संजय बेंगाणी भाई धीरू भाई जिस तरह से टिप्पणी बोझ भगवान अल्लाह प्रभू करे ऐसे दिन किसी को न दिखाए .
क्रमश:
30 जन॰ 2009
बंदौं संत असज्जन चरणा
इस ब्लॉग सहित मेरे सभी ब्लॉग'स पर
गूगल बाबा की झोली से फोटो जुगाड कर
पोस्ट किए गएँ हैं . साथ ही इन ब्लॉग'स की
किसी विषयवस्तु से किसी को कोई आपत्ति हो
तो कृपया आप मुझे मेल करें ताकि भावातिरेक/व्यस्तता
में लिखी किसी-पोस्ट/उसके अंश का सुधार किया जा सके.
सार्थक प्रतिक्रयाएँ देकर सृजन शीलता की दिशा दीजिए
मेरा मिशन "हिन्दी-ब्लागिंग" में नए हस्ताक्षरों को
जोड़ना है न कि अनावश्यक विवादों की भूमि
बनाना है. फ़िर भी मानवीय भूलों के लिए आपकी सचेतक
ध्वनियाँ स्वागत योग्य हैं किंतु हंगामा स्वीकार्य नहीं
: एक लाईना कोशिश की
6 जन॰ 2009
लड़का क्या करता है..
लड़का क्या करता है....?जी ब्लॉगर हैं ।तो ठीक है उसकी शादी फीमेल से नहीं ई-मेल से कर दीजिए। शतरंज के खिलाडी हिन्दी के ब्लॉगर एक आभासी हार जीत का मज़ा लेना हो तो इन ब्लॉगर (जिनमें मैं भीशामिल हूँ) की भाव-भंगिमा से बांचा जा सकता है। हर बाजी "पोस्ट" को विजेता के भाव सेलिखते हम सच अदद टिप्पणियों / आगंतुकों की प्रतीक्षा में लग जातें हैं। कम टिप्पणियों केबाबजूद हार न मानना हमारी विशेषता हैं। नाते चिट्ठों पे टिपिया के मांग लेतें हैं टिप्पणी मिल भीजातीं हैं। कुछ आपसी पीठ खुजाई में बदस्तूर लगे रहतें हैं । किंतु यहाँ क्रिया की प्रतिक्रया कासिद्धांत लागू होता है , यदि दो बार के बाद टिप्पणी रिटर्न गिफ्ट से न आए तो अपन उस ब्लॉग पेटिपियाना तो दूर उधर निगाह भी नहीं करते। गिव एंड टेक का मसला है भई !! कुछ विस्तार से बागर-चर्चा हो इस हेतु मैं अपनी तुच्छ बुद्धि से ब्लॉगर वर्गीकरण करने की सोची समझी गलती कर रहाँ हूँ .......
"A" सर्टिफिकेट धारी ब्लॉगर के लिए सब कुछ जायज होता है। ये लोग एक समूह में काम करतें हैं । तू मेरी खुजा मैं तेरी पीठ खुजाऊं की तर्ज़ पे हिन्दी ब्लागिंग जारी है।
"B" इस सर्टिफिकेट धारी ब्लॉगर जहाँ बम वहाँ हम भी का पूरी निष्ठा से पालन करें हैं ।
"C" सर्टिफिकेट धारी ब्लॉगर बेचारे किस्म के होते हैं । जो समझ ही नहीं पाते कि "किस राह पे रुकना है किस छत को भिगोना है "
इन प्रमाण पत्रों के रंग से भी आप समझ लीजिये रेड ज़ोन से जुड़ना है -यलो या ग्रीन ज़ोन से । मेरी राय तो यात्री -या-माल गाड़ी से बन जाइए . ब्लॉग परिचालन प्रणाली का अनुपालन कीजिए मज़े से ब्लागिंग कीजिए । बिंदास होके
12 फ़र॰ 2008
नई दुनिया जबलपुर पर ब्लॉग-चर्चा
जबलपुर के दैनिक अखबार ने ब्लॉग पर चर्चा की है आज यहाँ क्लिक कीजिए => नई दुनिया जबलपुर पर ब्लॉग-चर्चा
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