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26 मई 2010

इस आवेदन पत्र के प्रारूप का प्रिंट निकालिये

कार्यालय भारतीय-ब्लागर संघ ,
पता:द्वारा ब्लागवाणी,चिट्ठाजगत,
क्रमांक/       /2010                                           दिनांक:-     
प्रति
भारतीय जनगणना कार्यालय
नई-दिल्ली, {जहां कुछ दिन पहले ब्लागर मीट हुई थी }
द्वारा:- अविनाश वाचस्पति,खुशदीप जी, अजय  झा जी 
मान्यवर
भारतीय ब्लागर आपसे अपेक्षा करतें हैं कि हमें जिनकी  तादात लगभग हज़ारों में हैं को अलग से गिना जावे.  इस देश में  गिना जाना उतना ही ज़रूरी है जितना कि .............. खैर.... छोड़िये शर्म  आती है कहने में....इस देश में  गांव की मवेशी तक को गिना जाता है और एक बेचारा ब्लॉगर .....................
अस्तु इस आवेदन पर विशेष ध्यान दीजिये
             भवदीय
..............................................
ब्लॉगर......................................
यू आर एल..................................
{नोट:-इस आवेदन पत्र के प्रारूप की प्रति निकालिये और भेज दीजिए उपर लिखे नामों में से किसी के मार्फ़त देखें क्या होता है}

7 जन॰ 2010

हमें हर मामले में उंगली करनें में महारत हासिल है .



अंगुली करने में हम भारत वालों की कोई तोड़ नहीं है ।हमें हर मामले में उंगली करनें में महारत हासिल है .....!गोया कृष्ण जीं ने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पे क्या उठाया हमने उनकी तर्ज़ पर हर चीज़ को अंगुली पे उठाना चालू कर दिया है । मेरे बारे मे आप कम ही जानते हैं ...! किन्तु जब अंगुली करने की बात हो तो आप सबसे पहले आगे आ जायेंगें कोई पूछे तो झट आप फ़रमाएंगे "बस मौज ले रहा था ?" अंगुली करने की वृत्ति पर अनुसंधान करना और ब्रह्म की खोज करना दोनों ही मामलों में बस एक ही आवाज़ गूंजती है "नयाति -नयाति" अर्थात "नेति-नेति" सो अब जान लीजियेजिसे जो भी सीखना है सीख सकता है बड़ी आसानी से ...! जानते हैं कैसे ? अरेभाई केवल अंगुली कर कर के !! मुझ जैसे लोग जो कम्प्युटर का कम भी न जानते थे बस अंगुली कर कर के कम्प्युटर-कर्म सीख गया देखिये मेरी अंगुली को आज तक कुछ भी नहीं हुआ ...! ये अलहदा बात है कि कम्प्यूटर ज़रूर थोड़ा खराब हुआ । इससे आप को क्या शिक्षा मिली ......? यही कि "चाहे जहाँ ,जितनी भी अंगुली करो अंगुली का बाल भी बांका नहीं होगा । इतिहास गवाह है कृष्ण जीं की अंगुली याद करिये !इंद्र की बोलती बंद कर दी योगेश्वर ने उनकी अंगुली का कुछ भी न हुआ. होता भी कैसे प्रभु ने अंगुली बनाते वक़्त उसके अनुप्रयोग के बाद किसी भी विपरीत प्रभाव के न पड़ने का अभय दान सिर्फ अँगुलियों को ही दिया था. आज देखिये कितने लोग सिर्फ अंगुली उठा कर जीवन यापन कर रहें  हैं =>  अब खबरिया/जबरिया टी वी चैनल्स को ही देखिये अंगुली दिखा दिखा के उठा आपकी हालत खराब करना इनकी ड्यूटी है आप इनकी अंगुली पे अंगुली नहीं उठा सकते . यदि आप यह करना भी चाहें तो.........संभव नहीं है कि आप कुछ कर पायेंगें .
इस  पोस्ट  का अगला भाग:-यानि ब्रिगेडियर  मिसिर  कृत  आलेख बांचिये इधर =>;;"भाग-02" 
अथवा इधर  

अम्बेडकर बाबा को  अपुन का विनत प्रणाम

कितना असरदार

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