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22 सित॰ 2011

बेटी बचाओ अभियान : जनजन का अभियान



            बेटी बचाओ अभियान :  जनजन का अभियान
                                     *गिरीश बिल्लोरे, जबलपुर मध्य-प्रदेश
           ( चार्ट अ)                           
क्रम
भारत एवम मध्य-प्रदेश
1991
2001
2011
01
भारत
927
933
940
02
मध्य-प्रदेश
912
920
930

मध्य-प्रदेश में 05  अक्टूबर से बेटी बचाओ अभियान का शुभारम्भ जनचेतना को जगाने का एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बेहद ज़रूरी भी है. कारण है पिछले दस वर्षों में सम्पूर्ण भारत का  लिंगानुपात 933 से बढ़कर 940 हो गया जो भले ही एक उत्तम स्थिति कही जा सकती है किंतु  बच्चो का लिंगानुपात स्वतंत्र भारत के सबसे निचले स्तर पर जो एक नकारात्मक  सूचना है. एक और ज़रूरी तथ्य जो समाज का बेटियों के बारे में दृष्टिकोण उज़ागर करता है वो है नवजात शिशुओं की मृत्यु दर  (भारत की स्थिति )  वर्ष 1990,1995,2000,2005 तथा  2009  तक हमेशा बालिकाओं की मृत्यु का आंकड़ा सदैव अधिक ही रहा. ये अलग बात है कि नवजात शिशु मृत्यु की स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया है. किंतु बालिका मृत्यु दर सदा ही कुल शिशु मृत्यु के प्रकरणों का तुलनात्मक परीक्षण पर ग्यात होता है कि बालकों के सापेक्ष बालिकाओं की मृत्यु प्रथम दो वर्षों क्रमश: 90,95 में तीन2000 में 2, 2005 में 5, तथा 2009 में पुन: 3 अधिक है. यानी प्रदेश की स्थिति देखें तो सकल शिशु मृत्यु दर 67 मध्य-प्रदेश में तथा 12 प्रति हज़ार केरल में आंकलित की गई. यानी प्रति हजार जीवित जन्मों में से 67 बच्चों का पहला जन्मदिन न मना पाना दु:खद स्थिति है. बालिकाओं के संदर्भ में सोचा जाए तो लगता है कि वास्तव में हम बेटियों के उपरांत उनकी बेहतर देखभाल के लिये  अभी भी उत्साहित नही हैं. सरकार ने प्रसव हेतु अब जननी एक्सप्रेस   लाड़ली लक्ष्मी योजना, कन्यादान योजना क्रियांवित कर पालने से पालकी तककी ज़िम्मेदारी स्वीकार ली है तो फ़िर हम क्यों बालिकाओं के लिये नज़रिया बदलने में विलम्ब कर रहें है.  
   मध्य-प्रदेश सरकार  का "बेटी-बचाओ अभियान" पांच अक्टूबर से प्रारंभ होगा जो  हमारे चिंतित मन को चिंतन की राह देगा ये तय है.. बस एक समझदारी की ज़रूरत को दिशा देते इस अभियान में छिपे संदेशों को समझिये और समझाईये उनको जो यह नहीं जानते कि बेटी का होना कोई बोझ नहीं यदि हमारी सोच सकारात्मक है. नर्मदांचल में माएं अपनी बेटियों को ससुराल विदा करते वक़्त उसकी कोख की पूजन करतीं हैं. जो यह साबित करने के लिये पर्याप्त है कि देश की सांस्कृतिक-सामाजिक व्यवस्था बेटी के लिये कदापि नकारात्मक नहीं किंतु काय-विज्ञान और परीक्षण तक़नीकी विकास ने भ्रूण परीक्षण को आकार दिया.और आम आदमी अजन्मी-बेटियों के अंत के लिये सक्षम हो गया. इस पाशविक सोच से मुक्ति का मार्ग है प्रशस्त करेगा  "बेटी बचाओ अभियान" .
  देश के समग्र विकास के साथ लिंगानुपात में कमी आना हमारे सर्वांगीण विकास की सूचना तो कदापि नहीं होगी . आकंड़े देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हम किस कदर भयभीत हैं बेटी के जन्म से. 
              लिंगानुपात में नकारात्मक्ता प्रदर्शित करने वाले जिलों की स्थिति देखें जहां  एक  हजार पुरुषों  के सापेक्ष  महिलाओं का आंकड़ा कम है वे  जिले हैं भिंड  838, मुरैना  839, ग्वालियर  862, दतिया  875, शिवपुरी  877, छतरपुर  884, सागर  896, विदिशा  897, 
                      इसके  कारण में मूल रूप से बेटियों के लिये नकारात्मक सामाजिक-सोच के अलावा कुछ भी नज़र नहीं आता . इसी सोच को बदलने के लिये  मध्य-प्रदेश-सरकार ने लाड़ली-लक्ष्मी योजना, और मंगल दिवस कार्यक्रमों का संचालन बालिकाओं के प्रति  सामुदायिक सोच में बदलाव लाने के प्रारंभ किया. इतना ही नहीं सरकार की कन्या दान योजना, नि:शुल्क गणवेश और सायकल वितरण,कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू कर दिया. 
सम्पूर्ण भारत के सापेक्ष मध्यप्रदेश लिंगानुपात में 10 प्रतिहज़ार का अंतर है. यानी प्रति हज़ार पुरुष के पीछे  930 महिलाएं हैं यानी 70 महिलाएं अभी भी कम हैं. जबकि भारतवर्ष में समग्र रूप 60 महिलाएं. प्रति हजार पुरुष के पीछे कम हैं. जिसका कारण कम लिंगानुपात वाले जिले है.    
                       मध्य-प्रदेश में यह अभियान उस दिन से ही शुरु माना जाएगा जिस दिन से सरकार ने लाडली लक्ष्मी जैसी जन हितैसी योजना को आकार दिया जिसका आधार ही लिंगानुपात में कमी लाना था. योजना के तहत बालिका को बालिका के लिये  6000/- के मान पोस्ट-आफ़िस में फ़िक्स बचत लिये जातें हैं इतना ही नहीं अध्ययन सहायता के लिये  6 वीं कक्षा में 2000 रूपये, कक्षा 9 वीं में  4000 रूपये, कक्षा 10 वीं में 7500 और 11वीं कक्षा से 200 रूपये प्रतिमाह दो वर्ष तक दिये जाने का प्रावधान भी है। कुल मिला कर बालिकाओं के लिये पालने से पालकी तककी चिंता करने वाली मध्य-प्रदेश सरकार ने बेटी बचाओ अभियान के  ज़रिये यह   संदेश दिया है कि समुदाय यानी हम-आपको बेटियों के प्रति सोच बदलनी ही होगी 
यानी सरकार की चिंता है आपकी बेटी आप बस चिंतन कीजिये .. खुद से पूछिये कि "बेटियों के बग़ैर आपको आपका घर" कैसा लगता है. कभी सोचा है आपने कि धीरे धीरे कम होती बेटियां देश को किस गर्त में ढकेलने जा रहीं हैं. यदि नहीं तो आज से अभी से सोचना शुरु कीजिये. तय है कि आप ज़ल्द ही इस नतीज़े पर पहुंच जाएंगे कि बेटी बचाना क्यों ज़रूरी है..?
     जी सही सोच रहे हैं आप बेटियों के अभाव में विकास का पहिया अपनी धुरी पर घूमता नज़र आएगा आपको.  एक सृजनिका को समाप्त होना जिन सामाजिक विकृतियों को आपको सौंपेगा उनमें से एक होगी "मानव-संसाधनों की कमीं" जिसकी भरपाई के लिये कोई सा विज्ञान सक्षम न होगा




17 जन॰ 2010

हिंदी ब्लागिंग पर हुए बेबाक :शरद कोकास [पोडकास्ट साक्षात्कार]

                                           छतीसगढ़ के साहित्यकार एवं हिन्दी ब्लागिंग के लिए एक ज़रूरी और  महत्वपूर्ण ब्लॉगर शरद कोकास से लम्बी बात चीत सुधि पाठको के लिए सादर प्रस्तुत है इस सुनने यहाँ चटका लगाइए
                                                                                                                         
मेरा फोटो
शरद कोकास ने अपने साक्षात्कार में हिन्दी ब्लागिंग पर् खुल   कर अपनी बात कही

 शरद  कोकस  से  साक्षात्कार 


कोकास जी के ब्लॉग लिंक


7 जन॰ 2010

हमें हर मामले में उंगली करनें में महारत हासिल है .



अंगुली करने में हम भारत वालों की कोई तोड़ नहीं है ।हमें हर मामले में उंगली करनें में महारत हासिल है .....!गोया कृष्ण जीं ने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पे क्या उठाया हमने उनकी तर्ज़ पर हर चीज़ को अंगुली पे उठाना चालू कर दिया है । मेरे बारे मे आप कम ही जानते हैं ...! किन्तु जब अंगुली करने की बात हो तो आप सबसे पहले आगे आ जायेंगें कोई पूछे तो झट आप फ़रमाएंगे "बस मौज ले रहा था ?" अंगुली करने की वृत्ति पर अनुसंधान करना और ब्रह्म की खोज करना दोनों ही मामलों में बस एक ही आवाज़ गूंजती है "नयाति -नयाति" अर्थात "नेति-नेति" सो अब जान लीजियेजिसे जो भी सीखना है सीख सकता है बड़ी आसानी से ...! जानते हैं कैसे ? अरेभाई केवल अंगुली कर कर के !! मुझ जैसे लोग जो कम्प्युटर का कम भी न जानते थे बस अंगुली कर कर के कम्प्युटर-कर्म सीख गया देखिये मेरी अंगुली को आज तक कुछ भी नहीं हुआ ...! ये अलहदा बात है कि कम्प्यूटर ज़रूर थोड़ा खराब हुआ । इससे आप को क्या शिक्षा मिली ......? यही कि "चाहे जहाँ ,जितनी भी अंगुली करो अंगुली का बाल भी बांका नहीं होगा । इतिहास गवाह है कृष्ण जीं की अंगुली याद करिये !इंद्र की बोलती बंद कर दी योगेश्वर ने उनकी अंगुली का कुछ भी न हुआ. होता भी कैसे प्रभु ने अंगुली बनाते वक़्त उसके अनुप्रयोग के बाद किसी भी विपरीत प्रभाव के न पड़ने का अभय दान सिर्फ अँगुलियों को ही दिया था. आज देखिये कितने लोग सिर्फ अंगुली उठा कर जीवन यापन कर रहें  हैं =>  अब खबरिया/जबरिया टी वी चैनल्स को ही देखिये अंगुली दिखा दिखा के उठा आपकी हालत खराब करना इनकी ड्यूटी है आप इनकी अंगुली पे अंगुली नहीं उठा सकते . यदि आप यह करना भी चाहें तो.........संभव नहीं है कि आप कुछ कर पायेंगें .
इस  पोस्ट  का अगला भाग:-यानि ब्रिगेडियर  मिसिर  कृत  आलेख बांचिये इधर =>;;"भाग-02" 
अथवा इधर  

अम्बेडकर बाबा को  अपुन का विनत प्रणाम

29 दिस॰ 2009

ब्रिगेडिअर्स मोर्चा सम्हाल लें

The
      
ब्रिगेडिअर्स मोर्चा सम्हाल लें आज किसी ने हमारे ब्लॉग पर एक अवार्ड से घातक हमला किया है
इस बात से हमारी सीमाओं पे खतरा बढ़ गया है आप सबको अब सावधान होने की ताकीद की जाती है
कौन कहाँ तैनात होगा  
और क्या करेगा  ? 
कार्टून बम लेकर कहीं भी
ललित शर्मा
इन को सिर्फ दूरबीन से मुआइना करना है
विजय  तिवारी  " किसलय"
किसी भी ले में रोज़ एक दोहा बम पटकें अपने ब्लाग से  तथा एक ब्रिगेड से  
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
हर ब्लॉग से मिसाइल दागेंगे
लाल और बवाल (जुगलबन्दी)
बाहरी सीमा पर लुकमानी नुस्खे आज़माएँ
बी एस पाबला
प्रिंट मीडिया पर चौकस नज़र रहें
महफूज़ अली
सभी को महफूज़ रखने की ड्यूटी दी जाती है इनको
महेन्द्र मिश्र
ज़ल्द नया कम्प्यूटर खरीद कर नए कम्प्यूटर का सम्मान करें
अंकुर  बिल्लोरे 
नया रंग रूट है सबकी तोपों के खोखे बीने 
शरद कोकास
जिधर बम हो उधर तुम हो सरकार
महाशक्ति
सारी शक्तियां वापस जमा करें युद्ध नज़दीक है
अविनाश वाचस्पति
फिल्म बनवा कर .?
दीपक  'मशाल'
जीत की मशाल जलाएं एडवांस में 
अजय कुमार झा
पाबला जी से पूछ के बताता हूँ आप क्या करेंगे 
बवाल
मत मचाना शत्रु होशियार दीखे है
दिव्य नर्मदा
शत्रु को पहचाने दिव्य दृष्टि का अनुप्रयोग जारी करें किसी एक पोस्ट ब्रिगेडीअर की पोस्ट के तुरंत बाद पोस्ट न करेंगें कम से कम बारह घंटे 
उड़न  तश्तरी 
आकाह मार्ग पर नज़र रखिये 
जी.के. अवधिया
खेत सम्हालें 
_______________________
इस  कवायद  से  हम वार्मअप होंगे तथा उस झूठे अवार्ड दाता को पकड़ पायेंगे जिसने है हमको  दिया है ये वाला अवार्ड
The


17 अक्टू॰ 2009

लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे के हैप्पी-दीपावली

________________________शापित यक्ष ________________                 
       दीवाली के पहले गरीबी से परेशान  हमारे गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे ने विचार किया इस बार लक्ष्मी माता को किसी न किसी तरह राजी कर लेंगें . सो बस सारे के सारे लोग माँ को मनाने हठ जोगियों की तरह  रामपुर की भटरिया पे हो लिए जहां अक्सर वे जुआ-पत्ती खेलते रहते थे पास के कस्बे की चौकी पुलिस वाले आकर उनको पकड़ के दिवाली का नेग करते ये अलग बात है की इनके अलावा भी कई लोग संगठित रूप से जुआ-पत्ती की फड लगाते हैं..... अब आगे इस बात को जारी रखने से कोई लाभ नहीं आपको तो गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे की  कहानी सुनाना ज़्यादा ज़रूरी है.
__________________________________________
तो गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम - नौखे की बात की वज़नदारी को मान कर  "रामपुर की भटरिया" के  बीचौं बीच जहां प्रकृति ने ऐसी कटोरी नुमा आकृति बनाई है बाहरी अनजान  समझ नहीं पाता कि "वहां छुपा जा सकता है. जी हां उसी स्थान पर ये लोग पूजा-पाठ की गरज से अपेक्षित एकांतवासे में चले गए ..हवन सामग्री उठाई तो लंगड़ के हाथौं  से गलती से घी ज़मींन में गिर गया . बमुश्किल जुटाए संसाधन का बेकार गिरना सभी के क्रोध का कारण बन गया .  कल्लू ने तो लंगड़ को एक हाथ रसीद भी कर दिया ज़मीं के नीचे घी रिसता हुआ उस जगह पहुंचा जहां एक शापित-यक्ष बंधा हुआ था .उसे शाप मिला था की  सबसे गरीब व्यक्ति के हाथ  से गिरे  घी की बूंदें तुम पर गिरेंगीं तब तुम मुक्त होगे सो मित्रों यक्ष मुक्त हुआ मुक्ति दाता लंगड़ का आभार मानने उन तक पहुंचा . यक्ष को देखते ही सारे घबरा गए कल्लू की तो घिग्घी बंध गई. किन्तु जब यक्ष की दिव्य वाणी गूंजी "मित्रो,डरो मत, तो सब की जान में जान आई.
यक्ष:तुम सभी मुझे शाप मुक्त किया बोलो क्या चाहते हो...?
मुन्ना: हमें लक्ष्मी की कृपा चाहिए उसी की साधना में थे हम .
यक्ष: ठीक है तुम सभी चलो मेरे साथ
  सभी मित्र यक्ष के अनुगामी हुए पीछे पीछे चल दिए पीपल के नीचे बैठ कर यक्ष ने कहा :-"मित्रो,मैं पृथ्वी भ्रमण पर निकला था तब मैनें अपनी शक्ति से तुम्हारे गांव के ज़मींदार सेठ गरीबदास की माता से गंधर्व विवाह किया था उसी से मेरा पुत्र जन्मा है जो आगे चल के सेठ गरीबदास के नाम से जाना जाता है."
                    यक्ष की कथा को बडे ही ध्यान से सुन रहे चारों मित्रों के मुंह से निकला :-"तो आप ही हमारे बडे ज़मींदार हैं ?"
 "हां, मैं ही हूं, घर-गिरस्ति में फ़ंस कर मुझे वापस जाने का होश ही न रहा सो मुझे मेरे स्वामी ने पन्द्र्ह अगस्त उन्नीस सौ सैतालीस  रात जब भारत आज़ाद हुआ था शाप देकर "रामपुर की भटरिया में कैद कर दिया था और कहा था जब गांव का सबसे गरीब आदमी घी तेल बहाएगा और उसके छींटै तुम पर गिरेंगे तब तुम को मुक्ति-मिलेगी.
                        आज़ तुम सबने मुझे मुक्त किया चलो.... बताओ क्या चाहते हो ?
 सभी मित्रों ने काना-फ़ूसी कर "रोटी-कपडा-मकान" मांग लिए मुक्ति दाताओं के लिये यह करना यक्ष के लिए सहज था. सो  उसने माया का प्रयोग कर  गाँव के ज़मींदार के घर की लाकर  तिजोरी बुला   कर ही उन गरीबों में बाँट दी  . जाओ सुनार को ये बेच कर रूपए बना लो बराबरी से हिस्सा बांटा कर लेना और हां तुम चारों के लिए मैं हर एक के जीवन में एक बार मदद के लिए आ सकता हूं.
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 उधर गांव में कुहराम मचा था. सेठ गरीब दास गरीब हो गया. पुलिस वाले एक एक से पूछताछ कर रहे थे. इनकी बारी आये सभी मित्र बोले "हम तो मजूरी से लौटे हैं." किन्तु कोई नहीं माने झुल्ला-तपासी में मिले धन को  देख कर सबको जेल भेजने की तैयारी की जाने . कि लंगड़ ने झट यक्ष को याद कर लिया . यक्ष एक कार में गुबार उडाता पहुंचा और पुलिस से रौबीली आवाज़ में बोला "इनको ये रूपए मैंने इनाम के बतौर दिए हैं."ये चोर नहीं हैं.
रहा सवाल सेठ गरीब दास का सो ये तो वास्तव में गरीब हैं
हवालदार ने कहा :-सिद्ध करोगे
यक्ष: अभी लो  गाँव के सचिव से  गरीबी रेखा की सूची मंगाई गई जिसमें सब से उपर सूची अनुसार सबसे ऊपर सेठ गरीब दास का नाम था
  सूची में जो नाम नहीं थे वोलंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे के...?
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