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3 जुल॰ 2010

बाल कविता: आन्या गुडिया प्यारी संजीव 'सलिल'

बाल कविता: 


आन्या गुडिया प्यारी

संजीव 'सलिल'
*













*

आन्या गुडिया प्यारी,
सब बच्चों से न्यारी।

गुड्डा जो मन भाया,
उससे हाथ मिलाया।
हटा दिया मम्मी ने,
तब दिल था भर आया ।

आन्या रोई-मचली,
मम्मी थी कुछ पिघली।
नया खिलौना ले लो,
आन्या को समझाया ।

आन्या बात न माने,
मन में जिद थी ठाने ।
लगी बहाने आँसू,
सिर पर गगन उठाया ।

आये नानी-नाना,
किया न कोई बहाना ।
मम्मी को समझाया
गुड्डा वही मंगाया ।

मम्मी ने ले धागा ,
कार में गुड्डा टाँगा ।
आन्या झूमी-नाची,
गुड्डा भी मुस्काया ।


फिर महकी फुलवारी,
आन्या गुडिया प्यारी।

31 मार्च 2010

काव्य रचना: मुस्कान --संजीव 'सलिल'

काव्य रचना:

मुस्कान

संजीव 'सलिल'

जिस चेहरे पर हो मुस्कान,
वह लगता हमको रस-खान..

अधर हँसें तो लगता है-
हैं रस-लीन किशन भगवान..

आँखें हँसती तो दिखते -
उनमें छिपे राम गुणवान..

उमा, रमा, शारदा लगें
रस-निधि कोई नहीं अनजान..

'सलिल' रस कलश है जीवन
सुख देकर बन जा इंसान..

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