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15 दिस॰ 2009

नए ब्रिगेडियर अवधिया जी का स्वागत है


आज ब्रिगेड पर को जी.के. अवधिया देख कर अभिभूत हुआ और तकनीनी कारणों से मेरा ब्रिगेड ज्वाइन करने में विलम्ब का आभास होते ही मैंने पुन: आमंत्रण प्राप्त कर ब्रिगेड ज्वाइन कर ली । आप जो भी इसे ज्वाइन करना चाहें तो मेल कीजिये स्वागत है
आपका डूबे जी

9 दिस॰ 2009

सलीम भाई कुंठा का कोई अंत नहीं है

अल्पग्य लोगों कुंठा का कोई अंत नहीं है अन्यथा ब्रिगेडियर-महफूज़ अली को विशेष-रपट देने की क्या ज़रुरत थी .किसिम किसिम के विचार उठ रहें हैं मन में कितनी गन्दगी है....उन लोगों के ..जो....घटिया और गलीच सोच वाले जो हिंसा के रास्ते धर्म की स्थापना करने निकल पड़े.किसी धर्म के रास्ते चलकर ईश्वर को पहचाना जाता है. जबकी कुंठित-लोग जिन्हें धर्म के सार-तत्व यानी अध्यात्म का ज्ञान नहीं है वे ईश्वर को परिभाषित करने की बेवज़ह कोशिशों में लिप्त हैं . जब सभी पंथों धर्मों के दिव्य साहित्यों में लिखा है कि ईश्वर से साक्षात्कार सहज नहीं है न तो चार किताबें बांच के कोई देवदूत हो जाता न ही श्लोक ऋचाएं गाकर उस दिव्य शक्ति की प्राप्ति होती है. सौरभ भाई आपकी सोच जब इतनी उम्दा है
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना .
तो एक बार तो सोचते तो शायद इतनी अफसोस जनक स्थिति नहीं आती गौर से देखो इस तस्वीर में तुम्हारे आराध्य नहीं तुम दौनों ही हो .=>
प्रिय भाई जो सच्चा ईश्वरवादी होगा वो अपने आप से बेखबर होगा उसे यह तक नहीं मालूम होता कि वो कौन है. न तो वो हिन्दू होता है न मोमिन न सिक्ख न ईसाई वो सिर्फ और सिर्फ एक इंसान होता है.जिसे कहा खुद तराशता है. अपना अंश भरता है उसमें . जो खुद के तर्कों के ज़रिये प्रभू के पथ पर चलने का अभिनय करता है उससे परम पिता का कोई नाता वैसे भी नहीं होता. मुझे आपसे बस इतनीं गुजारिश करनी है कि प्रभू की खोज सलीम खान जैसों की बकवास से रुके न .! महफूज़ भाई जैसे भी हैं.... जो वाकई "स्वच्छ सन्देश दे रहे हैं.!"

8 दिस॰ 2009

ब्रिगेडियर अंकुर बिल्लोरे की पोस्ट



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अजय कुमार झा साहब एवं बी एस पाबलाजी का हार्दिक स्वागत
मेरा नमन स्वीकारिये सच कहूं मुझे ज़्यादा हिंदी पोस्ट लिखना नहीं आता किन्तु कोशिश है की जो लिखूं आपको और सबको पसंद आये . आज जबलपुर-ब्रिगेड पर मुझे विजय अंकल की पोस्ट पड़ने से लगा की सभी एग्रेसिव मीडिया के विरोधी हैं. सही भी है मीडिया सबको बन्दर समझे यह अनुचित है. मीडिया को आदर्श स्वरुप में आना ही होगा वरना मेरे बाद की पीड़ियाँ इस का कोई और विकल्प तलाश ही लेंगी. समाज के कल्याण के लिए सभी को तैयार रहना है. सभी को स्वयं में बदलाव लाने है चाहे ब्यूरोक्रेसी हो मीडिया हो अथवा सरकार और जनता . किसी भी प्रकार से दो और दो का जोड़ पांच बनाने की कोशिशें तरक्की के लिए हर्डल साबित होंगी. हम युवा देश का सच में विकास चाहतें हैं तभी तो हमने अपने रास्ते खोज ही लिए किन्तु आज भी देश के अधिकाँश लोग जिस उबाऊ व्यवस्था को सीने से चिपकाए हैं और विकास का नारा बुलंद करतें हैं तो लगता है की कोई खिलौने बेचने वाला हमें झुन झुना बजा के रिझा रहा है.धर्म के नाम पर जाती वर्ग आय के नाम पर जो देश का बंटवारा हुआ है उससे हम युवाओं को सबसे बड़ा आघात मिला है. जब भी कभी हम सोचतें है की देश किधर जा रहा है तो लगाता है देश उस दिशा में जा रहा है जो दिशा किसी भी शहीद ने न सोची थी और न उस और सोचने के सूत्र ही दिए थे. मीडिया चिंतन से दूर है, व्यवस्था दूषित राजनीति से प्रभावित है,कार्य पालिका भयभीत है तो इस देश की दशा और दिशा क्या होगी आप ही अंदाज़ लगाइए,आपने सोचा यदि समूचा विश्व हम पर हावी हो भी जाए तो हम परास्त नहीं हो सकते यदि हम में "पाजिटिव=उर्जा" है तो.....!
भारत के सम्पूर्ण विकास के लिए हमें लक्ष्यों को साधना है वह भी धैर्य के साथ बिना किसी पूर्वाग्रह के
आपका शुभाकांक्षी

27 अक्टू॰ 2009

बन जाइए "ब्रिगेड के ब्रिगेडियर "


दुनियाँ में आप कहीं भी हों आप अगरचे जबलपुरिया हैं तो
यदि
आप ब्लॉगर हैं
आप सामाजिक सरोकारी हैं
आपमें ब्लागिंग की लगन हैं
अथवा ब्लागिंग की इच्छा रखतें हैं
आपके
पास- चिंतन का घट है
आपके विचार विचार ही नहीं
"छांह दार वट है "
तो बस एक मेल भेजिए
बन जाइए "ब्रिगेड के ब्रिगेडियर "
यहाँ आप कुछ भी कहें धुंआधार कहें
किसी धर्म/व्यक्ति/समूह/वर्ग/वर्ण
सम्मान को बनाए रखते हुए कहें
आप का हार्दिक अभिवादन है

भवदीय

गिरीश बिल्लोरे मुकुल
सिपाही वास्ते जबलपुर ब्रिगेड
girishbillore@gmail.com

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