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25 अग॰ 2008

मैं तुम्हारा आख़िरी ख़त

एक
मैं तुम्हारा आख़िरी ख़त जाने किसके हाथ आऊं
तुम पढो इक बार मुझको इक नया संचार पाऊं !
सौंपना चाहो मुझको सौंप दो पीडा का सागर
मैं उसे मथ भेज दूंगा काढ़ के अमिय-गागर...!!
दो

स्वप्न प्रिया
मैंने भी देखे हैं सपने
चांदनी से सपने…..
क्या पूरे होंगे कभी?
मुझे नहीं मालूम
फिर भी मेरा हक है
सपने देखने का
वो सपना जो तुमको
मुझसे मिलाता है
पूरा ही तो है
कौन कहता है स्वप्न पूरे नहीं होते
*गिरीश बिल्लोरे मुकुल

24 अग॰ 2008

23 अग॰ 2008

एक साथी एक सपना साथ ले

ज़ाकिर हुसैन
''एक साथी एक सपना साथ ले, हौसले संग भीड़ से संवाद के ।''
ज़ाकिर हुसैन चाहतें हैं सबसे सहयोग : 30 जून 1982,को जन्मे ज़ाकिर-हुसैन डटें हैं मुंबई में अपने भविष्य को सवारने !आभास-जोशी के बाद मध्य-प्रदेश के अंग रहे छत्तीसगढ़ का यह गायक वास्तव में सपनों की पोटली लिए अपने मित्र अविनाश के साथ माया-नगरी में ज़ोर आज़माइश कर रहा है।संगीत के रसिकों की नजर में ज़ाकिर के हाई और लो नोड नियंत्रित हैं . गायन में सहज़ता है . इसी कारण अन्तिम दस में स्थान पाने में ज़ाकिर हुसैन सफल हुए हैं . चूंकि रियलिटी शो का वोटिंग फार्मेट ऐसा की जो वोट पाएगा वो ही आगे बड़ता जाएगा. अत: ज़ाकिर ने सहयोग की मार्मिक अपील करते हुए मुझसे गत रात्रि टेलीफोनिक बात चीत के दौरान कहा कि- मुझे नहीं मालूम कि मैं कैसे मध्य-प्रदेश के संगीत प्रेमियों तक अपनी बात रखूँ भैया अगर आप जबलपुर मीडिया के ज़रिए मेरीआकांक्षा व्यक्त करने में सहायता करें तो तो तय है कि छत्तीसगढ़ और सारा देश मिल कर मुझे और आगे तक ले जा सकता है ! छत्तीसगढ़ के इस युवक का सम्बन्ध एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार से है. १२ वीं तक शिक्षित के रोज़गार का ज़रिया आर्केष्ट्रा रहा है. जन्म के एक बरस बाद पोलियो की गिरफ्त में आए ज़ाकिर की दो संतानें हैं , आभास जोशी स्नेह मंच के सदस्यों द्वारा ज़ाकिर हुसैन को वाइस-ऑफ़-इंडिया द्वितीय के पक्ष में टेली एवं एस एम् एस वोटिंग करने-कराने की अपील की है . आभास जोशी के भाई श्रेयश जोशी ने ज़ाकिर के बारे में कहा - "अपनी तरह की अनोखी आवाज़ है जाकिर की रफी के गीतों को गाने की जोखिम कम ही गायक उठातें हैं लेकिन जाकिर जिस मौलिकता के साथ सहजता से रफी साहब को स्वीकारा है उसका ही परिणाम है कि सब का ध्यान ज़ाकिर जी अपनी और खींच लेते हैं "

16 अग॰ 2008

चिंतनकाल




आम आदमी के आक्रोष-बेचैनी में बेबसी , सवाल दागता पुण्य प्रसून बाजपेयी का ब्लॉग कुछ करने की सलाह दे रहा है किंतु सभी अभिमन्यु का ज़न्म अपने घर में होने देने से भयभीत सा हो जाता है। क्यों इस बात पर गंभीर ता से विचार ज़रूरी हो गया है। कोई बात नहीं अभिमन्यु का जन्म कहीं भी हो .... हो तो मेरा संकेत स्पष्ट है गर्भस्थ शिशु के आने के पूर्व आज का अर्जुन-रुपी पिता न तो आपनी पत्नी को चक्रव्यूह से निकालने का गुर नहीं सिखाते , वे केवल इस बात की चिंता करतें हैं की गर्भ में पल रहा भ्रूण किसका है...? कंहीं लड़की तो नहीं ..........?
उनको चिंता है बेटी न जन्मे अन्यथा वे भयावह चक्र व्यूह में फंस जाएंगे ...... उधर वही सब लोग जो व्यवस्था को चाय-पान ठेले पे गरियाते हैं चल पडतें हैं भ्रूण-परीक्षण कराने .....!
इन चिंता करने वाले वर्ग को एक बात समझनी ज़रूरी है की वे नेताओं को जितना भी गरिया लें लेकिन जब स्वार्थ सिद्ध करना हो रुके काम को गति दिलानी हो तो बिलकुल भगत से बन कर इन्हीं के सामने खड़े दिखाई देते हैं "जो जग पानी ...."
सच्ची समाज सेवा, लिंगानुपात ,बाल-विवाह,दहेज़,जैसे मुद्दों पे धनात्मक एवं सार्थक कोशिश को कहा जा सकता है। वर्ना
एक गीत आस का
एक नव प्रयास सा
गीत था अगीत था !
या कोई कयास था...?
जैसी स्थिति रहेगी
सुधि पाठको भारत में सामाजिक चैतन्य से जुड़े बिन्दुओं पर केवल ४-५ प्रतिशत , विमर्श होता है शेष समय हम सियासी बात चीत में अथवा छिद्रान्वेषण में खर्च करतें हैं।

13 अग॰ 2008

गेंदा राम जी को श्रृद्धांजलि


ब्लॉगर भाइयो
स्वतन्त्रता दिवस पर मेरी हार्दिक बधाइयां स्वीकारिए !
दीगर एहवाल जे है कि गेंदा राम जी में राम नहीं रहे चका जाम करने वाले भैया लोग समझ रहें है वो गेंदा थे जो नहीं रहे।देश में अम्बाला जबलपुर भोपाल कुल मिला कर आम जीवन यदि प्रभावित हुआ तो उसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं जिम्मेदार है तो हमारी सोच यदि हम स्वतंत्र हैं तो अपनी स्वतन्त्रता के लिए दूसरे की स्वतन्त्रता के लिए बाधा न बनें । मुझे इस बात पे टिप्पणी नहीं करनीं कि आन्दोलन सही या ग़लत है
किसीने खूब कहा "सलीका चाहिए फूलों की गुफ्तगूँ के लिए "
हक तो गेदा राम जी को भी कि उन्हें समय पर इलाज़ मिले
ईश्वर मृत आत्मा को राम का सामीप्य दे
शान्ति.....शान्ति.......शान्ति........!
और भूमि पर अभिव्यक्ति के महा नायकों को जन स्नेह का वरदान मिले

इश्क...........लाली और ला........का !



ये इश्क हाय बैठे बिठाए ज़न्नत दिखाए हाँ
सावन की मदिर फुहार से हरियाया पथ तट और यहीं-कहीं एकांत में
थोड़ा रूमानी होने का हक सबको है
फोटो:संतराम चौधरी,

11 अग॰ 2008

संजीत भाई आज तो आप की जीत हुई है बधाई

· प्रतियोगिता के प्राप्त उत्तर
01:-fromSanjeet
togirishbillore@gmail.com

dateSat, Aug 9, 2008 at 3:13 PM
subjectजवाब
mailed-bygmail.com

hide details 3:13 PM (7 hours ago) Reply


1- मांग के साथ तुम्हारा गाने की शूटिंग भोपाल में हुई है।
2- रात का नशा गाने की शूटिंग भेड़ाघाट में नर्मदा में हुई है।

--
http://sanjeettripathi.blogspot.com/

......................संजीत..........................
गिरीश भाई भेड़ाघाट और पचमढी मुझे भी प्रिय है…
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Why is this spam/nonspam?
Suresh Chiplunkar to me
show details 12:02 AM (6 minutes ago) Reply


fromSuresh Chiplunkar
togirishbillore@gmail.com

dateSun, Aug 10, 2008 at 12:02 AM
subjectगिरीश भाई भेड़ाघाट और पचमढी मुझे भी प्रिय है…
mailed-bygmail.com

hide details 12:02 AM (6 minutes ago) Reply


क्या बात है गिरीश भाई,
पुरस्कार वगैरह देने लगे हैं आप, फ़िर पहले से लिख भी दिया कि "मध्यप्रदेश के किन जंगलों में…" इतना आसान न बनाईये सवाल को… सभी लोग बता देंगे कि ये शूटिंग भेड़ाघाट (जबलपुर) और पचमढ़ी में हुई है…
501/- का चेक भेज दीजियेगा… :) :) :)
सप्रेम और शुभकामनाओं सहित
--
सुरेश चिपलूनकर
(Suresh Chiplunkar)
http://sureshchiplunkar.blogspot.com

बालकिशन said...
पता नहीं.आप बताएं
9 August, 2008 4:38 AM
राज भाटिय़ा said...
मध्य प्रदेश के जबल पुर के जगलो मे
9 August, 2008 5:37 AM
सागर नाहर said...
शूटिंग का तो पता नहीं पर गीत बहुत ही मधुर है, मेरे सबसे पसंदीदा गीतों में से एक, इसी फिल्म का आना है तो आ राह में देर नहीं है.. वाला भी।बढ़िया गीत सुनवाने के लिये धन्यवाद
9 August, 2008 5:44 AM
Udan Tashtari said...
इस गीत की शूटिंग आउट डोरलोकेशन में हुई है.(जीत गये??)
9 August, 2008 11:39 AM
GIRISH BILLORE MUKUL said...
sameer jee gazab da rahe hain aapik dam sateek shooting out dor hee hai raj bhai ka javab jabalpur se 350 km door hai....?dekhen sahee zabab lie koi or baitha kaheen
9 August, 2008 11:48 AM
राज भाटिय़ा said...
याद आ गया जी गवालियर के पास,
9 August, 2008 5:18 PM
राज भाटिय़ा said...
अगर मेरा यह जबाब ठीक हुआ तो यह चेक बावरे-फकीरा"[सव्यसाची,जबलपुर,कृत पोलियो ग्रस्त बच्चों की सहाय को दे दिया जाये..यह सुन्दर वन मे शुट किया गया हे,
9 August, 2008 5:40 PM
ब्लॉग पत्रकार said...
bhai naya dour kaa ye geet baitul ke jangalon me filmaya hai shayad doosaraa bhedaghat men
10 August, 2008 4:04 AM
इस प्रतियोगिता में एक मात्र सही जवाब संजीत जी का रहा है उन्होंने जो ज़बाव दिया एक दम सही है
आप जबलपुर से भोपाल मार्ग में व्हाया होशंगाबाद राष्ट्रीय राज मार्ग पर यह देख सकतें हैं ।
संजीत भाई आपको पुन: बधाइयां
निवेदक
बावरे-फकीरा टीम
आभास-जोशी,संदीपा पारे,[गायक ],मास्टर श्रेयस जोशी,[संगीतकार],आशीष-सक्सेना,तकनीकि सहयोगी,
एस के बिल्लोरे,रविन्द्र जोशी.जितेन्द्र जोशी,शरद जोशी ,

10 अग॰ 2008

चटका लगाइए सही ज़वाब ई-मेल कीजिए और पाइए ५०१/-का चेक

:-=>इस गीत की शूटिंग कहाँ हुई
गीत मध्य प्रदेश के किस क्षेत्र के जंगलों में इसकी शूटिंग हुई है..?
ख:-Asoka - Raat Ka Nasha की शूटिंग कहाँ हुई ?
कोई एक ही पाएगा रुपए 501/-का गिफ्ट चेक
"बावरे-फकीरा"[सव्यसाची,जबलपुर,कृत पोलियो ग्रस्त बच्चों की सहायतार्थ
साईं-भक्ति-एलबम टीम] की ओर
BAS AAP CLIK KEEJIE सही ज़वाब ई-मेल कीजिए
501/= का गिफ्ट चेक आपके पते पर भेज दिया
जावेगा.
प्राप्त सही-जवाबों में से कोई एक भाग्यशाली
पाठक को ही पुरस्कार मिलेगा
आप को बताना है कि
इन गीतों का फिल्मांकन कहाँ हुआ
आपके मेल रविवार रात बारह बजे तक मुझे मिल जाएँ
मंगलवार को रात्रि बारह बजे तक परिणाम प्रकाशित कर दिए जावेंगे
girishbillore@gmail.com

5 अग॰ 2008

हम इस बार भी १५ अगस्त मनाएंगे


१५ अगस्त मनाएंगे
जी हर बार की तरह हम इस बार भी
१५ अगस्त मनाएंगे
जन गन मन गाएंगे
हम देश भक्त हैं साबित करने
ए० आर० रहमान के गीत "माँ तुझे सलाम " गुनगुनाएँगे.
फ़िर बाल बच्चों के साथ छुट्टी मनाएंगे
हम लोग भाई अपने को बड़ा राष्ट्र प्रेमी साबित करने पे तुले हैं।
ये अलग बात है कि हम माँ के दूध से एकाध बार ही धोए गए अथवा धुले हैं।
सारी सफेदी बगुलों के बाद की नेताओं को मिली है
उनकी वाणी में सफ़ेद झूठ
और
खादी की पोशाक गोया नए रिन की बट्टी से धुली है......!
भारत की महानता के नाम पर आत्म-गीत गायेंगे ..... !
और नौकरशाह बंद गले के काले सूट में मंडराएंगे.....?
भाई अब आज़ाद है भारत
सबको आज़ादी के मायने समझ में आ गए हैं
तभी तो गिद्धों की तरह लुटेरे पंछी आकाश पे छा गए हैं !
बूडे गिद्ध के पूछने पर युवा सेना पति ने बताया
"दादा दुनिया से शान्ति को हमने कुछ भाग खा लिया हैं
थोड़ा-थोड़ा कर पूरा खा जाएंगे"
जो मज़ा दहशत गर्दी में हैं हजूर वो और कहाँ मिलेगा
आप चिंता न करिए इस बार भी मौका हम को ही मिलेगा
हमारी इच्छा के बगैर पत्ता भी न हिलेगा
गिद्धराज ने कहा : वीर,भारत के जन नायकों की
हमारे इस युद्ध पर नज़र नहीं हैं
कैसी हैं महा नायकों के बाद की पीड़ी
गिद्धों के समवेत सुर गूंजे "वो दिखा रही हैं एक दूसरे की सी0 डी0"
और महाकवि ...?
हाँ दादा महाकवि जिगर से बीड़ी जलवाने
बिपासा को नचवा रहें हैं....!
अब तो इस देश में हम इंसानों की काया में प्रवेश करते हैं
उनकी चेतना हरते हैं ...!
फ़िर जी भर के देश में दमन करतें हैं
इनकी आज़ादी हमारे लिए उपहार हैं
क्योंकि इनके चिंतन में स्वार्थ की दीवार हैं...!
गिरीश बिल्लोरे मुकुल

3 अग॰ 2008

दोस्ती का हांफता हफ्ता और दोस्ती का दिन


आज मेरा ये दोस्त आस्तीन से बाहर आ कर मुझसे नाराज होकर मुंह फेर के बैठ गए... और गाने लगे
मेरे दोस्त किस्सा यह - क्या हो गया,सुना है की तू..............?
आज आस्तीन में बैठा वो मुझे लगा ये गाना सुनाने मैंने कहा भाई
तुम तो रोज़ मेरे साथ रहते हो आज जो एक दिन मुझे बाहर वालों को दोस्ती की दुहाई देने का मौका मिला तो आप बुरा मान क्यों रहे हो हो अरे :-हुए हैं तुम पे आशिक हम भला मानो बुरा मानो ...?
नहीं जी मैंने कई बार तुमको की बाहर वालों पे भरोसा मत करो , उनका न तो बाहर से और न ही भीतर से समर्थन लो याद है न बहनजी ने जिन पे किया भरोसा उन्हीं ने छीना परोसा........?
भरोसा करो तो किस पे अरे भाई कोई माने या न माने दोस्तों के दोस्ताने में अब वो बात कहाँ ...?
कौन सी बात ...?
वही बात जो प्रेमचंद - , की "पंच-परमेश्वर"के दोस्तों में हुआ करती थी।
अरे भाई छोडो न मैं ने तुमको न छोड़ना ....!
छोडोगे भी अरे मैंने फोन पे ही तो सबको "हेप्पी फ्रेंडशिप डे कहा है कोई मित्रता का कांट्रेक्ट साइन तो नहीं किया "
मेरा आस्तीन वाला दोस्त बोला - भाई कवि हो दुनिया दारी का इल्म नहीं है ...! हर कदम सम्हाल के रखना जादा दोस्त मत बनाओ एकाध है उसी से ही काम चलाओ। फ़िर इधर उधर भडास निकालते फिरोगे मुहल्ले भर में ॥!
की फलां ने ये किया ढ़िकाँ ने वो किया ।
मैंने कहा भैया कवि हूँ तभी दुनियादारी को करीब से बांच लेता हूँ तुमको याद है...ये सही है मिसाल बेमिसाल फ्रेंडशिप-अब नहीं मिल पाएगी रब से दुआ करो भाई की सलामत रहे दोस्ताना हमारा
अग्रिम आभार : दैनिक-भास्कर/यू-ट्यूब/

विशेष निवेदन: यह पोस्ट केवल हास्य-व्यंग्य के लिए है । किसी को आहत करना,उदेश्य नहीं । तस्वीरें अगर कापी राइट युक्त हैं तो कृपया अवगत कराइए !

1 अग॰ 2008

दोस्ती के इस सप्ताह को समर्पित

इस ब्लॉग को संगीत मय बनाने में मदद मिली "स्वर सृजन (SWAR SRIJAN) "की मैं आभारी हूँ डा. मेराज अहमद. अलीगढ, उत्तरप्रदेश का और मीत का
हजूर ये हफ्ता दोस्ती के नाम करने के पहले आप अपनी पारखी नज़र को तीखी करालीजिये
वर्ना आप कल कल्लू पान वाले की दूकान ,कहवा घर में या बाथ रूम में ये गुनगुनाते पाएगे ख़ुद को =>हम को किसके ग़म ने मारा, यह कहानी फ़िर सही ,
हाल फिल हाल एक बात कह दूँ
चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी अवारगी ने मुझको आवारा बना डाला ॥
आज एक पोलिटिकल प्रेस कांफ्रेंस देख कर मुझे लगा कि लोगों को अब चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है या कई तो जस्विंदर सिंह के सुर में सुर मिला के नही है रास्ता नहीं है । अभी वो कुछ दोस्त बज़्म में नहीं हैं जो कभी ये गुनगुनाया करते थे ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती थी उन्हें । किस से कहें ? ये अपनी पीडा
तो ठीक है आप किसी भी नीली इबारत पर चटका लगा के गीत/ग़ज़ल सुन लीजिए
दोस्त और दोस्ती पे मर्सिया पड़ने वाले दोस्तों के लिए मुझे दोस्त और दोस्ती की समझ है जो कुछ यूँ समझिए
=>दोस्ताना,याराना,मित्रता सब कुछ चाहे पवित्रता ....वर्ना :
अपने मक़सद के सैकड़ों सलाम होते हैं
काम के आदमी से सबको काम होते हैं ।

हाथों का मिलना ,दोस्ती का संकेत तो है खूँ की रफ़्तार हाथों से समझ लेता हूँ
किसे कितना वज़न देना है मुझको
नाप रफ़्तार ऐ खूँ ,दिल को बता देता हूँ

कितना असरदार

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